उत्तराखंड के पूर्व CM भगत सिंह कोश्यारी ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सौंपा देश का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान

नई दिल्ली/देहरादून:
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Koshyari) को सोमवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ (Padma Bhushan Award) से नवाजा गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें सार्वजनिक जीवन, राजनीति, शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया।


इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के साथ ही भगत सिंह कोश्यारी उत्तराखंड की उन चुनिंदा महान हस्तियों की सूची में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने देश स्तर पर राज्य का मान बढ़ाया है। उनकी इस उपलब्धि पर उत्तराखंड सहित देशभर में उनके समर्थकों और शुभचिंतकों ने खुशी जाहिर की है।
राष्ट्रपति भवन में गूंजी तालियां, देश-प्रदेश से मिलीं बधाइयां.


नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में आयोजित इस गरिमामयी समारोह में देश की कई जानी-मानी विभूतियों को सम्मानित किया गया। जैसे ही भगत सिंह कोश्यारी का नाम पुकारा गया, पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक, हर तरफ ‘भगतदा’ को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

‘भगतदा’ का सफर: शिक्षक और पत्रकार से लेकर मुख्यमंत्री तक उत्तराखंड में बेहद लोकप्रिय और प्रेम से “भगतदा” के नाम से जाने जाने वाले भगत सिंह कोश्यारी का जीवन सादगी और राष्ट्रसेवा की मिसाल रहा है।


शुरुआती जीवन: उनका जन्म 17 जून 1942 को उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के पालनाधुरा गांव में हुआ था।
करियर की शुरुआत: एक साधारण परिवार से आने वाले कोश्यारी जी ने अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद वर्ष 1964-65 में उत्तर प्रदेश के एटा जिले (राजा का रामपुर) में एक व्याख्याता (Lecturer) के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी।


पत्रकारिता और आपातकाल: उन्होंने समाज में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से पिथौरागढ़ से एक हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र का संपादन और प्रकाशन भी किया। आपातकाल (Emergency) के दौरान देशहित में आवाज उठाने के कारण उन्हें मीसा (MISA) कानून के तहत जेल भी जाना पड़ा था।


शिक्षा में योगदान: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के समर्पित स्वयंसेवक रहे कोश्यारी जी ने पिथौरागढ़ में सरस्वती शिशु मंदिर और विवेकानंद इंटर कॉलेज की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उत्तराखंड राज्य गठन और राजनीति में अमिट छाप
भगत सिंह कोश्यारी का उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन और यहाँ की राजनीति को दिशा देने में ऐतिहासिक

योगदान रहा है:
कैबिनेट मंत्री व मुख्यमंत्री: वर्ष 2000 में जब उत्तराखंड अलग राज्य बना, तब अंतरिम सरकार में उन्होंने कैबिनेट मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की कमान संभाली।


संसदीय अनुभव: वे उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे। इसके साथ ही उन्होंने देश के दोनों सदनों में प्रतिनिधित्व किया—वे राज्यसभा सांसद भी रहे और नैनीताल-ऊधम सिंह नगर लोकसभा सीट से सांसद चुनकर लोकसभा भी पहुंचे।
महाराष्ट्र और गोवा के राज्यपाल के रूप में संभाली कमान
5 सितंबर 2019 को उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया। अपने कार्यकाल के दौरान वे देश के सबसे बड़े राज्य के कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक राजनीतिक घटनाक्रमों के केंद्र में रहे। इसके अलावा, अगस्त 2020 में उन्होंने गोवा के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी पूरी निष्ठा के साथ संभाला।


सादगी और अनुशासन की प्रतिमूर्ति
भगत सिंह कोश्यारी को आज भी उनकी धानी धोती-कुर्ता, पहाड़ी टोपी, बेहद अनुशासित जीवनशैली और जमीन से जुड़े व्यवहार के लिए जाना जाता है। उत्तराखंड के सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगाने और सामाजिक चेतना का प्रसार करने के उनके प्रयासों को हमेशा याद किया जाएगा। उन्हें मिला यह ‘पद्म भूषण’ सम्मान समूचे उत्तराखंड का सम्मान है।