उत्तराखंड में लम्बे समय से अग्निवीर को लेकर तमाम तरीके के संशय चल रहे थे कि अग्निवीर चार साल बाद सेवानिवृत होकर क्या करेंगे.अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित हुई कैबिनेट बैठक में ‘अग्निवीर सेल ‘ को मंजूरी दे दी है. साथ ही शहीद सैनिकों के सम्मान में पैतृक गाँव में मूर्तियां लगाने का फैसला लिया गया है।
धामी कैबिनेट ने अग्निवीरों के भविष्य और राज्य के वीर शहीदों के सम्मान से जुड़े दो अहम फैसलों पर मुहर लगाई है. उत्तराखंड में अब सेवामुक्त होकर लौटने वाले अग्निवीरों को रोजगार और सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए अग्निवीर रोजगार सेल बनाया जाएगा. साथ ही शहीद सैनिकों की प्रतिमाएं उनके पैतृक गांवों में स्थापित की जाएंगी.
उत्तराखंड सरकार ने अग्निवीरों के सेवामुक्त होने के बाद उनके भविष्य को लेकर एक अहम पहल की है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सेवामुक्त होकर लौटने वाले अग्निवीरों के लिए समर्पित ‘अग्निवीर रोजगार सेल’ गठित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई. सरकार का कहना है कि यह सेल अग्निवीरों को उनकी योग्यता और कौशल के अनुसार रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं और संस्थानों में उपलब्ध संभावनाओं से जोड़ने का काम करेगा.
अग्निवीर संवाद कार्यक्रम में सीएम धामी ने की थी अग्निवीर सेल की घोषणा :
जुलाई माह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कुंआवाला स्थित यूथ फाउंडेशन कैंप के ‘अग्निवीर संवाद ‘कार्यक्रम में अग्निवीर सेल बनाने की घोषणा की थी।
पहले से ही सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण :
राज्य सरकार सेवानिवृत अग्निवीर सैनिकों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत का क्षैतिज आरक्षण देती है।और अब अग्निवीर सैनिकों को सेवानिवृति के बाद रोजगार के लिए ना भटकना पड़े उसके लिए राज्य सरकार ने स्वरोजगार और कौशल प्रशिक्षण देने की घोषणा की है. साथ ही व्यायवसायिक शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैबिनेट के इस फैसले की जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से साझा की. उन्होंने कहा उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य है, जहां सेवामुक्त होकर लौटने वाले अग्निवीरों के लिए समर्पित सेल गठित करने का निर्णय लिया गया है. सरकार का यह कदम उन युवाओं के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना को दर्शाता है, जिन्होंने भारतीय सेना में रहकर देश की सेवा की है.
शहीदों के पैतृक गांव में लगेगी प्रतिमा: कैबिनेट बैठक में सैनिकों और शहीदों के सम्मान से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया गया. सरकार ने निर्णय लिया है कि अमर बलिदानियों की प्रतिमाएं उनके पैतृक गांवों में स्थापित की जाएंगी. सैनिक कल्याण मंत्री ने बताया उत्तराखंड में हर साल बड़ी संख्या में सैनिक देश की सेवा करते हुए शहीद होते हैं. ऐसे में लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि प्रत्येक शहीद को उसके पैतृक गांव में सम्मान दिया जाए. वहां उनकी प्रतिमा स्थापित की जाए
