उत्तराखंड में LPG सप्लाई संकट: व्यावसायिक सिलेंडरों के वितरण के लिए नई SOP लागू

देहरादून: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर दिखने लगा है। आपूर्ति में आई बाधाओं को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने व्यावसायिक गैस सिलेंडरों के वितरण के लिए एक संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (Revised SOP) लागू कर दी है। इसके तहत अब राज्य में कुल 66% कोटे के आधार पर गैस की आपूर्ति की जाएगी।


क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय हालातों के कारण एलपीजी की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। ऐसे में सीमित संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए उत्तराखंड को 6% अतिरिक्त कोटा दिया गया है, जिससे राज्य का कुल आवंटन अब 66% हो गया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य आवश्यक सेवाओं और प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों को प्राथमिकता देना है।


किस सेक्टर को कितनी मिलेगी गैस?
नई गाइडलाइन के तहत राज्य सरकार ने अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरतों के आधार पर वितरण तय किया है:
रेस्टोरेंट और ढाबे: इस सेक्टर को सबसे अधिक 32% (करीब 2000 सिलेंडर) का कोटा दिया गया है।


होटल और रिजॉर्ट: पर्यटन को ध्यान में रखते हुए इन्हें 24% (करीब 1500 सिलेंडर) आवंटित किए गए हैं।


औद्योगिक इकाइयां: मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए 20% (करीब 1250 सिलेंडर) का प्रावधान है।


विवाह समारोह: शादी के सीजन के लिए 10% (करीब 660 सिलेंडर) आरक्षित रखे गए हैं।


सरकारी गेस्ट हाउस: इनके लिए 5% (करीब 300 सिलेंडर) तय किए गए हैं।


अन्य क्षेत्र: डेयरी, फूड प्रोसेसिंग और छात्र आवास (Hostels) के लिए 3-3% का कोटा निर्धारित है।


शादी-ब्याह के लिए विशेष राहत और नियम
शादी के सीजन को देखते हुए सरकार ने विशेष प्रबंध किए हैं। किसी भी विवाह समारोह के लिए अधिकतम दो व्यावसायिक सिलेंडर जारी किए जाएंगे। इसके लिए आयोजकों को जिला प्रशासन के पास आवेदन करना होगा। प्रशासन द्वारा दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही गैस वितरक अस्थायी कनेक्शन जारी करेंगे, ताकि गैस का दुरुपयोग न हो।


जिलावार वितरण और औद्योगिक प्राथमिकता
सरकार ने जिलों की मांग के अनुसार भी आवंटन तय किया है:
देहरादून को सामान्य कोटे में सबसे अधिक 31% हिस्सा मिला है, जबकि नैनीताल और हरिद्वार को 13-13 प्रतिशत आवंटित किया गया है।


औद्योगिक क्षेत्र में देहरादून, हरिद्वार और उधम सिंह नगर को प्राथमिकता दी गई है, जहां प्रत्येक जिले को 380-380 सिलेंडर दिए गए हैं।


आम जनता और घरेलू उपभोक्ताओं पर असर
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह नई गाइडलाइन केवल व्यावसायिक (Commercial) सिलेंडरों पर लागू है। घरेलू उपभोक्ताओं (Domestic) के लिए फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं है। हालांकि, बाजार में कुल उपलब्धता पर दबाव होने से अप्रत्यक्ष रूप से सप्लाई पर असर पड़ सकता है, लेकिन सरकार का यह कदम स्थिति को नियंत्रित रखने की एक महत्वपूर्ण कोशिश है।