उत्तराखंड सरकार ने उपनल के माध्यम से विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों की वर्षों पुरानी मांग को आखिरकार पूरा कर दिया है। इस फैसले से तत्काल तौर पर करीब सात से आठ हजार उपनल कर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा, जबकि आगे चलकर इसका फायदा शेष कर्मचारियों को भी मिलेगा।
कैबिनेट ने निर्णय लिया है कि बचे हुए कर्मचारियों को समान कार्य, समान वेतन के दायरे में चरणबद्ध तरीके से शामिल किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब उपनल कर्मी उपनल संस्था के बजाय सीधे संबंधित विभाग के साथ अनुबंध पर कार्य करेंगे।
प्रदेश में वर्तमान में 20 हजार से अधिक उपनल कर्मी विभिन्न विभागों में सेवाएं दे रहे हैं। ये कर्मचारी लंबे समय से समान पद, समान वेतन की मांग कर रहे थे। पूर्व सरकारों ने मानदेय में आंशिक बढ़ोतरी तो की, लेकिन वह अन्य संवर्गों जैसे होमगार्ड और पीआरडी जवानों की तुलना में अब भी कम रही।
सरकार इस दिशा में पहले भी प्रयास कर रही थी, लेकिन कानूनी अड़चनों के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही थी। इसके बाद उपनल कर्मियों ने हाईकोर्ट का रुख किया। न्यायालय के निर्देशों के क्रम में सरकार ने इस विषय पर कैबिनेट उपसमिति का गठन किया, जिसने कर्मचारियों की बात भी सुनी।
पिछली कैबिनेट बैठक में 12 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मियों को समान पद, समान वेतन देने पर चर्चा हुई थी। गुरुवार को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अधिकतम कर्मचारियों को लाभ देने के लिए योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
पहले चरण में वर्ष 2025 तक 10 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले उपनल कर्मियों को समान पद के अनुरूप बेसिक वेतन दिया जाएगा। भविष्य में शेष कर्मचारियों को भी इस व्यवस्था में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही अब ये कर्मचारी विभागीय अनुबंध पर कार्य करेंगे, जिससे उनकी स्थिति विभागीय कर्मियों के समान हो जाएगी।
