केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत बने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) परिसर को नया नाम दे दिया है। अब यह अत्याधुनिक परिसर ‘सेवातीर्थ’ के नाम से जाना जाएगा। सरकार के इस कदम को शासन में सेवा भावना और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

PMO परिसर बना ‘सेवातीर्थ’

सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के अंतर्गत निर्मित यह नया PMO परिसर अब तक प्रधानमंत्री कार्यालय के रूप में ही जाना जाता था। अब, इसे आधिकारिक तौर पर ‘सेवातीर्थ’ नाम दिया गया है। यह नामकरण प्रधानमंत्री के पद और कार्यालय को ‘जन सेवा का पवित्र स्थान’ (तीर्थ) के रूप में स्थापित करने के दृष्टिकोण को दर्शाता है।

‘सेवातीर्थ’ के नामकरण के साथ ही, केंद्र सरकार ने देश भर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राजभवनों (राज्यपाल/उपराज्यपाल के आवास) के नाम बदलने की प्रक्रिया को भी तेज कर दिया है। इसका उद्देश्य औपनिवेशिक काल की शब्दावली से दूरी बनाते हुए भारतीय पहचान और स्थानीय संस्कृति को महत्व देना है।

मिली जानकारी के अनुसार, अब तक देश के आठ राज्यों ने अपने राजभवनों के नामों में बदलाव कर दिया है। यह प्रक्रिया जल्द ही देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू होगी।

नाम बदलने वाले राज्यों की सूची में पश्चिम बंगाल, गुजरात, तमिलनाडु, त्रिपुरा, केरल, उड़ीसा, असम और उत्तराखंड शामिल है। इसके अलावा, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में भी उपराज्यपाल के राज निवास का नाम बदलकर ‘लोक निवास’ कर दिया गया है।

सरकार का यह कदम प्रशासनिक भवनों को नया नाम देकर उन्हें नागरिकों के साथ जुड़ाव और सेवा के केंद्र के रूप में स्थापित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।