शेख हसीना को फंसी की सजा का ऐलान, माना 1400 हत्‍याओं का जिम्‍मेदार!

बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय क्राइम ट्रिब्यूनल ने पिछले साल जुलाई अगस्त के महीने में हुई हिंसा के दौरान हुई हत्याओं के लिए पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है। पूर्व पीएम सहित पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमलैंड और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून पर भी मानवता के विरुद्ध अपराधों का मुकदमा चलाया गया है।

जानकारी के लिए आपको बता दे कि शेख हसीना को तीन मामलों में दोषी ठहराया गया है। जिनमें न्याय में बाधा डालना, हत्याओं का आदेश देना और दंडात्मक हत्याओं को रोकने के लिए कदम उठाने में फेल रहना शामिल है। वहीं बांग्लादेश के पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को कोर्ट ने मौत की सजा नहीं दी है। बल्कि उन्हें सरकारी गवाह बनाया है।

हिंसा में 1400 से ज्यादा लोग मारे गए

जानकारी के अनुसार पिछले साल 15 जुलाई से लेकर 5 अगस्त के बीच हुए विरोध प्रदर्शनों में करीब 1400 से जायदा लोग मारे गए थे। इनमें से ज्यादातर लोग सुरक्षाबलों द्वारा की गई गोलीबारी में मारे गए। पिछले साल हुई ये हिंसा साल 1971 के बाद दूसरी सबसे भीषण हिंसा थी।

बता दे कि अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि उन्होंने छात्रों के नेतृत्व वाले विद्रोह को दबाने के लिए शेख हसीना द्वारा प्रदर्शनकारियों पर घातक बल प्रयोग करने के सीधे आदेश के सबूत खोज निकाले।

जानकारी के लिए आपको बता दे कि जिस इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल ने पूर्व पीएम शेख हसीना को फंसी की सजा सुनाई उसकी स्थापना शेख हसीना की ही सरकार ने किया था। इस इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल का उद्देश्य 1971 में बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के दौरान किए गए अत्याचारों के लिए आरोपियों पर मुकदमा चलाना था, जब देश ने पाकिस्तान से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की थी।