ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में रविवार को एक भीषण मास शूटिंग की घटना सामने आई है। न्यू साउथ वेल्स पुलिस के मुताबिक, इस गोलीबारी में अब तक 9 आम नागरिकों और एक संदिग्ध हमलावर की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 60 लोग घायल हुए हैं। यह घटना सिडनी के बॉन्डी बीच इलाके में हुई, जहां यहूदी समुदाय हनुक्का त्योहार का आयोजन कर रहा था।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हमलावरों ने जानबूझकर हनुक्का उत्सव को निशाना बनाया। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने इस हमले को “बेहद चौंकाने वाला और दिल दहला देने वाला” बताया। उन्होंने कहा कि पुलिस और आपात सेवाएं तुरंत मौके पर पहुंचीं और घायलों की जान बचाने में जुटी हैं।
हमले के बाद न्यू साउथ वेल्स पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है और अब तक दो लोगों को हिरासत में लिया गया है। लोगों से बॉन्डी बीच और आसपास के इलाकों से दूर रहने की अपील की गई है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह गोलीबारी उस समय हुई जब समुद्र तट पर सैकड़ों लोग हनुक्का त्योहार की शुरुआत के लिए इकट्ठा हुए थे। हनुक्का यहूदी समुदाय का आठ दिन तक चलने वाला पर्व है और यह हमला इसके पहले ही दिन हुआ। सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड के मुताबिक, शाम करीब 6:30 बजे हमलावरों ने भीड़ पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कई लोग जमीन पर पड़े नजर आ रहे हैं, जबकि आसपास चीख-पुकार और सायरनों की आवाजें सुनाई दे रही हैं।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस आतंकी हमले पर गहरा दुख व्यक्त किया है। सोशल मीडिया पर जारी बयान में उन्होंने कहा कि हनुक्का के पहले दिन निर्दोष लोगों को निशाना बनाना एक जघन्य कृत्य है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि भारत इस मुश्किल घड़ी में ऑस्ट्रेलिया के साथ मजबूती से खड़ा है।
चश्मदीदों ने बयां किया दर्द
घटना के प्रत्यक्षदर्शी 30 वर्षीय स्थानीय निवासी हैरी विल्सन ने बताया कि उन्होंने कम से कम 10 लोगों को खून से लथपथ जमीन पर पड़ा देखा। उन्होंने कहा कि चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल था।
गौरतलब है कि लगभग 11 साल पहले भी सिडनी में लिंड्ट कैफे बंधक संकट जैसी भयावह घटना हुई थी, जिसमें 16 घंटे तक चले गतिरोध के बाद दो बंधकों और हमलावर की मौत हो गई थी।
